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सोमवार, 10 सितंबर 2012

कोई किसी से कम नहीं...




सुना है आजकल खुदा भी बेरोजगार है
सुनाया है http://fervent-thoughts.blogspot.in/2012/09/blog-post_6.html पर सौम्या ने !
ख्याल उमड़े - काश नौकरी की तलाश लिए
खुदा मेरे घर आए
तभी खुदा की आवाज़ आई
"तलाश तो तुम्हारी है
बेरोजगार तुम कहलाओ या मैं
बात एक ही है !"

डरती है वह अब खुशियों से ...
भला कोई खुशियों से भी डरता है
डर तो ख़ुशी के पीछे बुरा चाहनेवाले नज़रों की होती है
तो लगता है ख़ुशी से डर गए
.... ऐसा मत सोचो
वरना खुशियों को सोचना होगा
जाऊँ या न जाऊँ :)

अनीता जी देती हैं विश्वास कि कृष्ण किसी से दूर नहीं
सच है
कृष्ण दूर नहीं , अन्दर सारथी बने युद्धरत हैं
मोह.लोभ,क्रोध,विकार से युद्धरत
निरंतर, अनवरत !

जीवन कहीं कभी नहीं ठहरता
प्रश्नों की विभीषिका उत्तरों की मरीचिका में भटकती है
तय है अंत, फिर भी है भटकना
तो कह दिया है सुशील जी ने http://ulooktimes.blogspot.in/2012/09/blog-post_9.html पर
कि जा भटक कर आ ...
शायद यही हो निदान या कोई अनुसंधान या तथ्य का सारगर्भित ज्ञान !

चाहता हर कोई है दुःख का संहार
पर नहीं अछूता रहता वह राग द्वेष से
बनाता है मकड़ जाल
खुद को मान लेता है श्रेष्ठ
धारण कर लेता है सृष्टिकर्ता का चोगा
तभी तो कहना पड़ा महेंद्र वर्मा को
कि -
जो अपने को मान ले, ज्ञानी सबसे श्रेष्ठ,
प्रायः कहलाता वही, मूर्खों में भी ज्येष्ठ।

वैचारिक मतभेद को ढोना साथ रहकर
उसे विवशता बना लेना उचित नहीं
बड़े सौभाग्य से मनुज तन है मिलता
तो समय रहते यह निर्णय ही है फलता
जो कहा दिव्या शुक्ला ने सारे पृष्ठ पलट
क्योंकि -
छलने और छले जाने से
घृणा है मुझे ---

जीवन रूपी शतरंज की बाज़ी तभी अच्छी लगती है
जब आ जाए भलीभांति शह और मात देना
कहा है वंदना गुप्ता ने
कि यलगार है ...
अब हर प्रश्न से पूर्व मेरे उत्तर की शक्ति को भी सोचना
आदिशक्ति के तप की किताबी भाषा को
अब तक पढ़ा होगा
अब देखना मेरे हुंकार में !

तस्वीर के एक ही रुख को देखने से बेहतर है
सरस दरबारी की उधृत तस्वीरों से बातें कर लें
अंक एक नहीं कई हैं
और कोई किसी से कम नहीं ...

इस अंदाज के साथ फिर मुलाकात होगी -


13 टिप्‍पणियां:

  1. आपका यह प्रयास बेहद सराहनीय है ... आपके शब्‍दों में एक सी टिप्‍पणियों से कुछ अलग हटकर नये भावों को पढ़ना अवश्‍य ही रूचिकर होगा ...
    आभार

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  2. नई शुरुआत, मुझे उम्मीद है कि यहीं नए लोगों को आपका स्नेह मिले, कुछ नए लोगों को हम भी आपके जरिए जान सकें, वैसे तो तमाम फोरम अपने और अपनो में सिमटते जा रहे हैं।

    बहुत बहुत शुभकामनाएं..

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  3. आपने नई नई शुरुआत मुझे बहुत पसंद आयी
    सुना है आजकल खुदा भी बेरोजगार है ये पंक्तिया पढते ही
    एक अजीब ही अहसाश होता है
    मैं इस रचना कर को बधाई देना चहूँगा

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  4. आपके प्रयासों की जीतनी तारीफ की जाए कम ही होगा ... :)

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  5. main aap ko jitna bhi thankyou bolun kam hai.....aap encourage karti hain...inspire karti hain....thanks a lot rashmi ji from bottom of my heart :) :)

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  6. बहुत सुन्दर लिंक्स दी....
    आपके द्वारा चुने मोती निश्चित रूप से नायाब होंगें...

    आभार
    अनु

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  7. रश्मिजी किन शब्दों में आपका धन्यवाद करूँ.......!!!!!

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  8. एक अलग अंदाज !

    कुछ नासमझ
    फिर भी नहीं
    समझते है
    इसे लिये तो लोग
    उसे उल्लूक कहते हैं !

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  9. क्या कहूँ,निशब्द हूँ...आपकी उर्जा को नमन..

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  10. सागर की अतल गहराइयों से चुनिन्दा बेशकीमती मोती ढूँढ निकालने की आपकी विलक्षण योग्यता को नमन करने का मन होता है ! बहुत सुन्दर प्रयास है ! ढेर सारी शुभकामनायें एवं बधाइयाँ स्वीकार करें !

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  11. खूबसूरत मोती हैं सहेजे हुए!
    खजाना भर रहा है आपकी ब्लॉग में !

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  12. ये अन्दाज़ बहुत रोचक रहा ……सीमित लिंक्स आसानी से पढे जा सकते हैं।

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  13. मौलिक सूझ और नूतन अंदाज़ के लिए बधाई।

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