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बुधवार, 26 सितंबर 2012

गाहे गाहे इसे पढ़ा कीजे ...7



प्रेम से जब भी मुलाकात होती है
वह एक गीत बन हवाओं में बिखर जाता है कुछ यूँ -
बस एक क्लिक और कुहू गुप्ता की आवाज़ का जादू कहेगा 
'चलो तुमको लेकर चलें.....'

बोझिल आँखें,खुमार सी मुस्कुराहट और 

प्रियंकाभिलाषी - http://priyankaabhilaashi.blogspot.in/

तुम्हारा प्यार..
एकदम जिद्दी..
बिलकुल मुसलाधार बारिश जैसा..
कितना ही बचने की कोशिश करो..
रीत जाता है..
रूह की सतह तक..!!

ओम पुरोहित'कागद' - http://omkagad.blogspot.in/

एक लड़के से
एक लड़की मिली
दोनों में क्या बात हुई
इस पर
बातें घड़ी गई
बातें बनाई गई

बातें उड़ाई गई


बातें बिगाड़ी गई
बातें बिगड़ीं तो
बातें चलाई गई
बातें चल गईं तो
बात बिठाई गई
बात बैठ गई तो
बात बन गई 
बात बन गई तो
बात जमीं नहीं
बात जमी नहीं तो
बात समझाई गई 
बात मगर थमी नहीं
युग बीत गए
बात किस्सा बन गई
किस्से चल निकले तो
प्रेम कहानी कहलाए
फिर तो वही प्रेम 
उदाहरण बन गया
मंदिर-मज़ार भी बने
किस्से सुनाए जाने लगे
कहानी पढ़ी जाने लगी
उदाहरण दिए जाने लगे
शीश नवाए जाने लगे
चादरें चढ़ने लगीं
मेले सजने लगे 
प्रेम पर मगर
पाबंदी यथावत रही ।

आज भी 
प्रेम उचकता है
कान उठते हैं
जुबान चलती है
बातें निकलती हैं
प्रेम मगर थमता नहीं ।
प्रेम एक सफर है
बातों पर ही
हो कर सवार
शायद आया है प्रेम
इस सदी तक !


आरज़ू है,तमन्ना है,
ख्वाइश है, चाहत है,
तुझी से न जाने क्यों,
हमे इतनी मोहब्बत है।

सरोबार हर धड़कन मेरी
तेरे ही नाम से,
गहराई इस लगी की अब,
हर सांस तेरी इबादत है...

....................................................

प्यार ही जन्म है,प्यार मृत्यु,प्यार तर्पण,............प्यार के बगैर न सृष्टि,न आदिशक्ति ..... 
प्यार तर्क से परे है
वह प्रश्न है ही नहीं
वह एक निनाद है
जो निरंतर मुखरित है
बकवास करते हैं लोग
जो कहते है कि प्यार कहने की चीज नहीं...
प्यार कोई चीज नहीं
प्यार ॐ है
ॐ के बगैर जीवन नहीं
प्रेम के बगैर ॐ नहीं ......               क्रमशः 

7 टिप्‍पणियां:

  1. तीनों रचनाएँ...एक दूजे से अलग पर प्रेम की डोर बांधे हैं तीनों को एक साथ.सुन्दर!

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  2. थोड़ा लेकि‍न उम्‍दा. वाह अर्पणा क्‍या लि‍खती हैं,पानी और शीशे की तरह .. पढ़ कर आनंद आ गया. आपका धन्‍यवाद.

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  3. धन्यवाद रश्मि प्रभा जी..!!

    आभारी हूँ..!!

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  4. तुम्हारा प्यार..
    एकदम जिद्दी..
    बिलकुल मुसलाधार बारिश जैसा..
    कितना ही बचने की कोशिश करो..
    रीत जाता है..
    रूह की सतह तक..!!
    फिर कुछ कहा नहीं जाता ...

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  5. बहुत ही सुन्दर
    प्रेम रंग में रंगी..
    मनभावन रचनाएं..
    :-)

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